ehshash dil ka
Thursday, October 29, 2015
कब से तन्हाईयों के थे हम साथ में
कब से तन्हाईयों के थे हम साथ में
बाद मुददत के वो हमको कल मिल गये
चित्र आंखों में गुजरे उतरने लगे—
मुस्कुराहट भरे चार पल मिल गये।।
कवि सुदेश यादव जख्मी
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