Monday, March 27, 2017

माँ



समन्दर प्यार ममता का, जहां में माँ ही होती है।
हमें सूखे में रखती और खुद, गीले में सोती है।।
जरा सी चोट लग जाये अगर, बेटे या बेटी को—
हमारे साथ हंसती है, हमारे साथ रोती है।।
           कवि सुदेश यादव जख्मी

Friday, March 24, 2017

मां



सकल संसार मां से है, ये ममता प्यार मां से है।
ये हंसता खेलता पूरा, मेरा परिवार मां से है।।
मेरी छोटी सी ये दुनिया, सजाई है मेरी मां ने—
ये घर, घर है उसी मां से मेरा आधार मां से है।।
कवि सुदेश यादव जख्मी