सबसे बताउं कैसे और मैं छिपाउं कैसे
मैंने एक खत तेरे नाम लिख डाला है
कहीं लिखा सांवरी सी, कहीं लिखा बावरी सी
कहीं तुझे सुबहा कहीं शाम लिख डाला है
कहीं लिखा सीता जैसी पावन पुनीता जैसी
कहीं तुझे खास कहीं आम लिख डाला है
आब—ए—जमजम गंगाजल जैसी पावन तू
कहीं मैंने तुझे चारों धाम लिख डाला है।
कवि— सुदेश यादव दिव्य
मो—9368666665
