Tuesday, December 8, 2020

शब्द हूं मैं अगर

शब्द हूं मैं अगर उसका तुम अर्थ हो 
मेरे जीवन की तुम ही तो समर्थ हो 
चांद हो तुम स्वयं देख लो आईना 
खोलो व्रत चौथ का क्यों समय व्यर्थ हो
 डा0 सुदेश यादव दिव्य