सेवा त्याग परिश्रम की तू ही प्रतिमूर्ति है, तेरी सादगी ने इतिहास रच डाला है।
लाख आंधी तूफां आये, तू न कभी घबराये तेरे काम करने का ढंग ही निराला है।।
तू ही पैदा करता अन्न,नहीं मिलता पूरा धन,ढक पाये तू न तन तेरे घर न निवाला है—
हमपे तेरे अहसान,तू है कितना महान, तुझे कह दूं भगवान, तूने सबको ही पाला है।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी
