Thursday, August 28, 2014

चन्द्रशेखर से वीरों की दरकार है




लाजपत सा यहां कोई लाला नहीं
ना भगत सिंह सा कोई सरदार है
आजकल कोई अशफाक मिलता नहीं—
चन्द्रशेखर से वीरों की दरकार है।।

Sunday, August 24, 2014

तेज इतनी चले ना हवा बोल दो


तेज   इतनी  चले  ना  हवा  बोल  दो।
चाहतों  का  मेरी आज कुछ मोल दो।।
ठहर   जाउंगा  कुछ देर प्यासा हूं मैं—
तुम घटाओं सी जुल्फें अगर खोल दो।।

Wednesday, August 13, 2014

मुझको तुमसे ही प्यार है


मुझको तुमसे ही प्यार है अब तक
दिल   मेरा   बेकरार  है  अब  तक
 जानें  क्यों  फेर  ली  नजर तुमने—
मुझको तो इन्तजार है अब तक।।

तीर नजरों के हम पर चलाते रहे


 जख्म    देते    रहे    मुस्कुराते    रहे 
तीर  नजरों   के   हम  पर चलाते रहे
ऐसा  जख्मी  पे जादू किया आपने—
फिर भी ख्वाबों में तुम मेरे आते रहे।।

मुस्कुराने के दिन आ गये


इस  घनी  भीड  में  तुम  ही तुम छा गये।
ये   भी   संयोग  है  तुम  मुझे  भा   गये।।
कल के बारे में अब कुछ भी ना सोचिये—
मुस्कुराने  के  दिन  आ  गये—आ गये।।
        डा0सुदेश यादव जख्मी
          साहित्यकार/पत्रकार

Thursday, August 7, 2014

तुम कहां चल दिये इस तरह रूठकर





तुम कहां चल दिये इस तरह रूठकर
आंख से अश्क गिरने लगे फूटकर
तुमने कैसे भुला दी मौहब्बत मेरी—
हमने चाहा हमेशा तुम्हें टूटकर।।
          डा0सुदेश यादव जख्मी
               कवि/पत्रकार

क्यों उदासी का मंजर है


क्यों उदासी का मंजर है बतलाईये
दिल तुम्हारा है ये घर ना घबराईये
कौन रोकेगा अश्कों को बहते हुये—
मेरी आंखों मे रहकर ना यूं जाईये।।
       डा0सुदेश यादव जख्मी
     कवि/पत्रकार

Friday, August 1, 2014

कहां है मेरा हिन्दोस्तान


कहां है मेरा हिन्दोस्तान— कहां है मेरा हिन्दोस्तान।
जिसका   कभी  हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।

ऋषि  और  मुनियों  की  तपोभूमि  भारत  था,
आज  उसी  भेष  में  ही  बाबाओं  की  भीड  है।
अंधविश्वास   बढा   देख   रहा    समय    खडा,
मंदिरों    से   ज्यादा   यहां   पुज  रहा पीर है।।
सांई  का विवाद कहीं, कहीं जात—पात का है,
कहीं    बलि   चढने   को   आदमी  अधीर  है।
कुर्सियों   का खेल है ये सियासत का मेल है ये,
देश   के    प्रति   न   कोई   आज   गंभीर    है।।
 अपने  धर्म  संस्कृति  की  हम, खो बैठे पहचान,
      जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
                                                  कहां है मेरा हिन्दोस्तान— 

छोटे—छोटे     देश   देखो  आज  हमें  घूर  रहे,
जिनको    हमेशा     दिया    हमनें    सहारा  है।
कई     दफा     युद्ध    हुये    और  समझौते  हुये,
सीमाओं  पे   कई   बार   हमनें   उन्हें   मारा है।।
अपना  वो   देश   है  ये  जिसमें बलिदानियों ने,
 कई — कई    बार   अपने   सर   को  उतारा  है।
1 8 5 7     में    अपने    शहीदों      ने       ही,
गोरी     सरकार     को    भी   खूब  ललकारा है।।
 बिस्मिल  शेखर ने  सुभाष ने यहां दिये बलिदान,
  जिसका कभी हुआ करता था,दुनियां में सम्मान।।
                                                 कहां है मेरा हिन्दोस्तान— 

         बाल    मजदूरी    करें    पेट    फिर   भी    न   भरे,
          गोदामों     में     माल    सडे ,  बंद    इसे    कीजिये,
         शिक्षा स्वास्थ्य चिकित्सा को और भी बढावा मिले,
        जिनके   हैं   जो    भी   अधिकार    उन्हें     दीजिये।
        नारियां   सुरक्षित    रहें   कोई   न  अशिक्षित   रहे,
            दीन —  दु:खी     निर्धन   का   भी    हाल    पूछिये।।
          गददी   से   गददार   हटे   मजहबों   की   खाई   पटे,
         एक   दूसरे   का  हाथ  हाथों  में    लीजिये,
         तब   हम   कह    पायेंगे   सारे  भारत   मेरा   महान,
         जिसका  कभी  हुआ  करता था, दुनियां में सम्मान।।
                                                  कहां है मेरा हिन्दोस्तान— 
  
   दुराचारी    जेल    में     हों     भ्रष्टाचार   बंद     हो,
    ऐसी     ही    व्यवस्थाओं    की   आज  दरकार  है,
    भाईचारा    एकता     हो    उसी  में  अनेकता  हो,
    वो  ही  रहे  यहां  जिसे   भारत    से   प्यार  है।
    सीमाओं    पे    चौकसी    हो    घुसपैठ   बंद   करो,
  गोली   से   उडा   दो   उसे   जो   भी   गददार  है।।
   कोई   फिर   सुभाष   बनें   लेकर  के  तिरंगा  चले,
  बच्चा — बच्चा   आज  जान   देने  को  तैयार है।
    जख्मीं   पडी   भारती   दिव्य अब तो लो संज्ञान,
     जिसका कभी हुआ करता था दुनियां में सम्मान।।
                                                 कहां है मेरा हिन्दोस्तान—