Thursday, July 21, 2016
Thursday, June 2, 2016
तूने सबको ही पाला है
सेवा त्याग परिश्रम की तू ही प्रतिमूर्ति है, तेरी सादगी ने इतिहास रच डाला है।
लाख आंधी तूफां आये, तू न कभी घबराये तेरे काम करने का ढंग ही निराला है।।
तू ही पैदा करता अन्न,नहीं मिलता पूरा धन,ढक पाये तू न तन तेरे घर न निवाला है—
हमपे तेरे अहसान,तू है कितना महान, तुझे कह दूं भगवान, तूने सबको ही पाला है।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी
Friday, April 29, 2016
Saturday, March 26, 2016
Tuesday, March 22, 2016
लेके पिचकारी आ जाओ
लेके पिचकारी आ जाओ खलिहान में
तुमको बांहों का झूला झुलायेंगे हम
रंग डालेंगे दामन हरे रंग से
गीत अपनी मुहब्बत के गायेंगे हम
पहले ऐसे कभी तुमको देखा नहीं
फाग आते रहे फाग जाते रहे
आज तुम राधिका जैसी हमको लगी
सोचते हैं कृष्ण बन भी पायेंगे हम
पीली सरसों कहीं देख ले न हमें
आओ गुलमोहर की छांव में हम चलें
तुम भिगो दो हमें हम भिगो दें तुम्हें
ऐसी छब्बीसवी होली मनायेंगे हम
गेंहू की बालियां हंस रही देख लो
फूल भंवरों से करते हैं अठखेलियां
ऐसे मौसम में ये दूरियां किस लिये
आओ जख्मी गले से लगायेंगे हम।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी
Subscribe to:
Posts (Atom)




