Thursday, July 21, 2016

पहन पायलिया छम-छम चले आइए


मस्त सावन का मौसम चले आइए
पहन पायलिया छम-छम चले आइए
ये बतायेंगे मिलकर तुम्हें रूबरू-
कितने बेचैन हैं हम चले आईए।
       वैद्य सुदेश यादव दिव्य
       मो.9027687780
          9368666665

Thursday, June 2, 2016

तूने सबको ही पाला है


सेवा त्याग परिश्रम की तू ही प्रतिमूर्ति है, तेरी सादगी ने इतिहास रच डाला है।
लाख आंधी तूफां आये, तू न कभी घबराये तेरे काम करने का ढंग ही निराला है।।
तू ही पैदा करता अन्न,नहीं मिलता पूरा धन,ढक पाये तू न तन तेरे घर न निवाला है—
हमपे तेरे अहसान,तू है कितना महान, तुझे कह दूं भगवान, तूने सबको ही पाला है।।
                                         डा0 सुदेश यादव जख्मी

Saturday, March 26, 2016

हमनें नाग पाले हैं



किसे दिखलायें हम दिल में, हमारे कितने छाले हैं
हमारे रहनुमाओं के, अजब करतब निराले हैं
अदालत हो गई लाचार, बेबस और पंगु क्यों—
जो डसते हैं हमें हरपल, वो हमनें नाग पाले हैं।।
             कवि सुदेश यादव जख्मी

Tuesday, March 22, 2016

लेके पिचकारी आ जाओ


लेके पिचकारी आ जाओ खलिहान में
तुमको बांहों का झूला झुलायेंगे हम
रंग डालेंगे दामन हरे रंग से
गीत अपनी मुहब्बत के गायेंगे हम

पहले ऐसे कभी तुमको देखा नहीं
फाग आते रहे फाग जाते रहे
आज तुम राधिका जैसी हमको लगी
सोचते हैं कृष्ण बन भी पायेंगे हम


पीली सरसों कहीं देख ले न हमें
आओ गुलमोहर की छांव में हम चलें
तुम भिगो दो हमें हम भिगो दें तुम्हें
ऐसी छब्बीसवी होली मनायेंगे हम

गेंहू की बालियां हंस रही देख लो
फूल भंवरों से करते हैं अठखेलियां
ऐसे मौसम में ये दूरियां किस लिये
आओ जख्मी गले से लगायेंगे हम।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी