Friday, May 8, 2026

बस करो

 अब सताओ ना यूं, बस करो-बस करो

दिल दुखाओ ना यूं, बस करो-बस करो

इतनी तन्हाई में हम तो मर जायेंगे

दूर जाओ ना यूं, बस करो-बस करो

फूल खिल जायेंगे

 रब ने चाहा तो एक रोज मिल जायेंगे

पास फिर एक दूजे के दिल जायेंगे

मेरे जीवन की बगिया उदासी पडी

आप आ जाओ तो फूल खिल जायेंगे।

जिन्दगी की तरह

 मिल गये तुम हमें हर खुशी की तरह

प्यार बढता रहा तिश्नगी की तरह

तुम हमें प्यार चाहे करो ना करो

हमने चाहा तुम्हें जिन्दगी की तरह।

मुक्तक

क्यों बतायें किसी से हमें प्यार है

बेवफाई से बचने की दरकार है

आप आंखों की भाषा समझ लीजिए

मेरी खामोशी ही मेरा इकरार है।

Friday, November 29, 2024

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की

 आ रहा ऐसा जमाना, बात सुन लो काम की

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की।


कल जिसे उंगली पकड चलना सिखाया आपने

अपने कांधे पर बिठा मेला दिखाया आपने

खुद बने घोडा मगर उसको हंसाया आपने

है खिलौना कौन सा जो ना दिलाया आपने

पर बडे होकर ना हरगिज ही संभालेंगे तुम्हें

जोर से बोले अगर तो मार डालेंगे तुम्हें

ये नहीं चिंता करेंगे तेरे सुख आराम की

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की।


कलयुगी बेटे हैं ये शायद ना पालेंगे तुम्हें

सोचना मत ये बुढापे में संभालेंगे तुम्हें

सोचना मत गिर गये तो ये उठा लेंगे तुम्हें

सोचना मत रूठ जाओगे मना लेंगे तुम्हें

सोचना मत अपनी पलकों पर बिठा लेंगे तुम्हें

सोचना मत आश्रम में ये ना डालेंगे तुम्हें

वैसे तो बातें करेंगे राम की घनश्याम की

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की।


जिन्दगी भर सारे रिश्तों को निभाया आपने

हार कर खुद ही तनय को भी जिताया आपने

कैसे जीवन को जिएं ये भी सिखाया आपने

थी अगर गुरबत मगर फिर भी पढाया आपने

जो असंभव था उसे भी कर दिखाया आपने

जब कभी भटका तो रस्ते पर भी लाया आपने

कौन सा वो ज्ञान था जो ना सिखाया आपने

दे दी पूरी पाठशाला बिन टका बिन दाम की

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की।


बाल पन में जिनको बांहों में झुलाया आपने

खुद भले भूखे रहे सबको खिलाया आपने

हो गये बीमार पर फिर भी कमाया आपने

अपना दुख चेहरे पे आने से छिपाया आपने

सबको दी छाया मगर खुद को तपाया आपने

हर मुसीबत में ही रक्खा सर पे साया आपने

कर दिया जीवन हवन सोची नहीं आराम की

कल को ये रह जायेगी, संतान केवल नाम की।

डा. सुदेश यादव दिव्य उर्फ जख्मी

Saturday, March 16, 2024

लगा लो गले

लगा लो गले ना, बनो बेरहम

मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।


चले आओ होली का करके बहाना

तुम्हें चाहते हैं हम रंग लगाना

बड़ी दूर से आये, मिलने को हम

मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।


गुलों का है मौसम समा प्यारा—प्यारा

अगर चाहो दिल आज रख लो हमारा

उदासी को रंगों से, कर भी दो कम

मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।


वो देखो गुलों पर भ्रमर गा रहे हैं

बसंती है रूत मस्त दिन आ रहे हैं

गई ठण्ड मौसम, हुआ है गरम

मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।

      कवि डा. सुदेश यादव दिव्य


हमारा भारत देश महान

 हमारा भारत देश महान—हमारा भारत देश महान

बदल रहा है देश हमारा, जग करता सम्मान।

हमारा भारत देश महान...


डर का सामराज्य हटा, अपराध भी है घटा

खुली सांस लेने लगा, आज आम आदमी

रंगदारी लूटपाट, माफियों के ठाटबाट

नारियों के शोषण में आई है बड़ी कमी

सुविधाओं का सही समय पर है, आदान—प्रदान।

हमारा भारत देश महान...

सेनायें हैं बलशाली, सीमाओं की रखवाली

शत्रुओं के लिये सदा रहतीं तैयार हैं

किसकी मजाल कोई घूर सके भारत को

भारत के वीर लोहालाट दमदार हैं

वीर सिपाही निज भारत की बढ़ा रहे हैं शान।

हमारा भारत देश महान...

राम के हैं अनुयायी, आपस में भाई भाई

साथ साथ रहते, विवाद किस बात का

आपस में लड़ रहे, हम ये भी भूल गये

आदमी मुसाफिर है, बस एक रात का

हमें दिया है ऋषि मुनियों ने यहां ज्ञान विज्ञान।

हमारा भारत देश महान...

रामराज लाना होगा, देश को बचाना होगा

युवाओं के हाथ में ही, सारी बागडोर है

हमें तो समझना है, अपना कर्म करना है

फल देने वाला तो यहां पे कोई और है

हमको दिव्य बदलना होगा, समय बड़ा बलवान।

हमारा भारत देश महान...

          कवि सुदेश यादव दिव्य