Friday, February 28, 2014

प्यार करता हूं मैं तुमसे

                                                 




                                                        मुक्तक

                           प्यार करता हूं मैं तुमसे मगर मैं कह नहीं सकता।
                          चाहकर दूर भी तुमसे मगर मैं रह नहीं सकता।।
                          मैंने माना तू है नदिया,और मैं तो किनारा हूं—                    
                          मैं चाहूं भी अगर तो साथ तेरे बह नहीं सकता।।

Friday, February 14, 2014

वक्त को जाया ना कीजिए

     

                 मुक्तक

कुछ कम मिला है वक्त को जाया ना कीजिए।
बांहों में समां जाओ सताया ना कीजिए।।
हम पर भी बरस जानें दो, दो बूंद प्यार की—
जुल्फों में बादलों को छिपाया ना कीजिए।।
   
              डा0 सुदेश यादव जख्मी
                  कवि/साहित्यकार

तू अगर प्यार से मुझको



तू अगर प्यार से मुझको अपना कहे
तेरे गम सारे जानम उठाता रहूं
गीत मेरा गजल मेरी तू ही तो है—
तू अगर साथ दे रोज गाता रहूं।

मेरे ख्वाबों में तू और ख्यालों में तू
मेरी सांसों में महकी है खुशबू तेरी
तुझपे कुर्बान ये जानों ईमान हैं—
तुझको पलकों पे अपनी बिठाता रहूं।।

प्यार में कोई भी शर्त सौदा नहीं
दिल के बदले में दिल की ही दरकार है
बांधकर अपनी जुल्फों को आये अगर—
उम्र भर उनमें गजरे लगाता रहूं।

मेरे रहते हुये आंख नम हों तेरी
ये तेरी जिंदगी में तो होगा नहीं
जो मेरा है वो सब जानें जां है तेरा—
तेरी खुशियों पे सब कुछ लुटाता रहूं।।

सात जन्मों तलक साथ चाहूं तेरा
ये मेरे दिल की धडकन की आवाज है
तू यूं ही हीर बन—बन के आती रहे—
मैं यूं ही रांझा बनकर के आता रहूं।

जख्म खाये हैं जख्मी ने बेशक बहुत
जबसे तुम हो मिले दिल को आराम है
बस यूं ही मेरे पहलू में बैठे रहो—
दर्दो गम मैं जहां के भुलाता रहूं।।

        डा0सुदेश यादव जख्मी
            कवि/पत्रकार