Wednesday, December 24, 2014
Monday, December 1, 2014
Monday, October 20, 2014
आंख में आंसू भर—भर आये, सावन में
वो हमको ऐसा बिसराये, सावन में
आंख में आंसू भर—भर आये, सावन में
बिजली चमके बादल गरजे, डर जाउं
रिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन में
खिलते फूल महकती कलियां, न भायें
पुरवा बैरन आग लगाये ,सावन में
इतना हरजाई निकलेगा, सनम मेरा
इश्क किया करके पछताये, सावन में
पिछले खत पढ—पढ के ये दिल,रोता है
अब विरहन से सहा न जाये, सावन में
क्या लेना दुनियां से मुझको, बिन तेरे
दिलकश ये मौसम न भाये, सावन में
नहीं गिला, शिकवा हमको, बेगानों से
जख्मी ने ही जख्म लगाये,सावन में
डा0सुदेश यादव जख्मी
कवि/साहित्यकार
Saturday, October 11, 2014
Sunday, October 5, 2014
Wednesday, September 24, 2014
दिन गुजरते नहीं रात कटती नहीं
दिन गुजरता नहीं रात कटती नहीं ।
तेरी सूरत निगाहों से हटती नहीं।।
ऐसा जख्मी पे जादू किया आपने—
तेरी यादें भी मुझसे सिमटती नहीं।।
Friday, September 5, 2014
Wednesday, September 3, 2014
प्यार करने की कोशिश में दिन ढल गया
प्यार करने की कोशिश में दिन ढल गया,उनका शरमाना कम ना हुआ क्या करें।
चाहते थे उन्हें लेना आगोश में ,पर ना हमको उन्होंने छुआ क्या करें।।
नाजुकी फूल सी उनके अधरों पे थी, उनके रूखसार दहके थे अंगार से,
वो सुराही सी गर्दन झुकी ही रही ,गुदगुदाये कई मर्तबा प्यार से।
जैसे बचपन में थे शोख, चंचल हसीं, अब नहीं थे वो हमको लगा क्या करें।।
हम समझते रहे मीत बचपन का है, वो दुपट्टे को सानों पे ढकते रहे,
सादगी देखिये, बांकपन देखिये, कनखियों के हवाले से तकते रहे।
गीत बचपन का जब गुनगुनाने लगे, तब कहीं चेहरा उपर किया क्या करें।।
चाह बचपन से थी हम मिलेंगे कभी,उस खुदा ने मिलाया तो हम मिल गये,
जो दिये अब तलक हमको तन्हाई ने,जख्म भी सिल गये फूल भी खिल गये।
जो भी मांगी थी जख्मी ने रब से दुआ,वो कुबूल हो गई है दुआ क्या करें।।
Thursday, August 28, 2014
Sunday, August 24, 2014
Wednesday, August 13, 2014
Thursday, August 7, 2014
Friday, August 1, 2014
कहां है मेरा हिन्दोस्तान
कहां है मेरा हिन्दोस्तान— कहां है मेरा हिन्दोस्तान।
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
ऋषि और मुनियों की तपोभूमि भारत था,
आज उसी भेष में ही बाबाओं की भीड है।
अंधविश्वास बढा देख रहा समय खडा,
मंदिरों से ज्यादा यहां पुज रहा पीर है।।
सांई का विवाद कहीं, कहीं जात—पात का है,
कहीं बलि चढने को आदमी अधीर है।
कुर्सियों का खेल है ये सियासत का मेल है ये,
देश के प्रति न कोई आज गंभीर है।।
अपने धर्म संस्कृति की हम, खो बैठे पहचान,
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
छोटे—छोटे देश देखो आज हमें घूर रहे,
जिनको हमेशा दिया हमनें सहारा है।
कई दफा युद्ध हुये और समझौते हुये,
सीमाओं पे कई बार हमनें उन्हें मारा है।।
अपना वो देश है ये जिसमें बलिदानियों ने,
कई — कई बार अपने सर को उतारा है।
1 8 5 7 में अपने शहीदों ने ही,
गोरी सरकार को भी खूब ललकारा है।।
बिस्मिल शेखर ने सुभाष ने यहां दिये बलिदान,
जिसका कभी हुआ करता था,दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
बाल मजदूरी करें पेट फिर भी न भरे,
गोदामों में माल सडे , बंद इसे कीजिये,
शिक्षा स्वास्थ्य चिकित्सा को और भी बढावा मिले,
जिनके हैं जो भी अधिकार उन्हें दीजिये।
नारियां सुरक्षित रहें कोई न अशिक्षित रहे,
दीन — दु:खी निर्धन का भी हाल पूछिये।।
गददी से गददार हटे मजहबों की खाई पटे,
एक दूसरे का हाथ हाथों में लीजिये,
तब हम कह पायेंगे सारे भारत मेरा महान,
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
दुराचारी जेल में हों भ्रष्टाचार बंद हो,
ऐसी ही व्यवस्थाओं की आज दरकार है,
भाईचारा एकता हो उसी में अनेकता हो,
वो ही रहे यहां जिसे भारत से प्यार है।
सीमाओं पे चौकसी हो घुसपैठ बंद करो,
गोली से उडा दो उसे जो भी गददार है।।
कोई फिर सुभाष बनें लेकर के तिरंगा चले,
बच्चा — बच्चा आज जान देने को तैयार है।
जख्मीं पडी भारती दिव्य अब तो लो संज्ञान,
जिसका कभी हुआ करता था दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
Thursday, July 31, 2014
Monday, July 28, 2014
Wednesday, July 23, 2014
Wednesday, April 30, 2014
जबसे तुम आ गये
जबसे तुम आ गये जिन्दगी में मेरी
दूसरा कोई भी और भाता नहीं।
प्यार ही प्यार फैला है घर में मेरे—
बेरूखी, बेवफाई से नाता नहीं।।
एक अलग ताजगी ऐसी बातों में है
दिल करे सामने यूं ही बैठा रहूं
झील सी आंख में प्रेम पतवार ले
उम्र भर प्यार की नाव खेता रहूं
ये जमाना बडा तंग दिल है यहां
दिल में कोई किसी को बिठाता नहीं।।
बेवफाई के इस दौर में आजकल
आपसे थोडी मुझको वफा मिल गई
मेरी दीवानगी होश खोने लगी
चीज ऐसी ये पहली दफा मिल गई
आंख से दिल तलक रास्ता कर लिया
आपके बिन कोई इसमें आता नहीं।।
आरजू तुम मेरी जुस्तजू तुम मेरी
तुम मेरी हर खुशी बन्दगी तुम मेरी
जी रहा हूं जिसे मैं बडे शौक से
खूबसूरत सी ये जिन्दगी तुम मेरी
लग ना जाये किसी की नजर इस लिए
हर किसी को मैं दिल की बताता नहीं।।
सारे मंजर हंसी हो गये दूर तक
फूल कलियां सभी खिलखिलाने लगी
जख्म जख्मी के सारे पुराने भरे
एक रवानी सी जीवन में आने लगी
जिस तरह आपने साथ मेरा दिया
इस तरह कोई रिश्ता निभाता नहीं।।
डा0सुदेश यादव जख्मी
Saturday, April 5, 2014
गुलशन से एक फूल चुराया है
गुलशन से एक फूल चुराया है आपने
कलियों से भरा सेहरा सजाया है आपने।
सारे चमन की खुशबू को बांहों मे समेटा
और गुलिस्तां को प्यार बनाया है आपने।
अफरोज हो गये हैं सितारे भी इर्द—गिर्द
बस चांद को जमीं पे बुलाया है आपने।
मिलता नही है हर किसी को ऐसा मसीहा
दुनियां में जानें कितने हैं पाया है आपने।
बांधा है ऐसी डोर से दिल के अजीज को
शादी का नाम देके निभाया है आपने।
शुभकामनाएं दे रहे जख्मीं तुम्हे यही
महके वो फूल जिसको खिलाया है आपने।।
जीवन पथ पर जीवन साथी साथ चलें
जीवन पथ पर जीवन साथी साथ चलें।
जो थामा है वो ही लेकर हाथ चलें।।
महकी,मधुर,मस्त हों साथ बहारें भी—
साथ चॉंदनी,पूनम वाली रात चले।।
बन जाये मधुमास हरेक पल जीवन का—
अपनों के आशीषों की सौगात चले।।
रहो सदा एक दूजे के दिल में ऐसे—
जैसे खुशबू,फूल कली के साथ चले।।
जख्मीं तन्हा है पर साथ तुम्हारे तो—
यही दुआ है खुशियों की बारात चले।।
Sunday, March 16, 2014
लेके पिचकारी आ जाओ खलिहान में
लेके पिचकारी आ जाओ खलिहान में।
तुमको बॉहों का झूला झुलायेंगे हम,
रंग डालेंगे दामन हरे रंग से—
गीत अपनी मुहब्बत के गायेंगे हम।।
पहले ऐसे कभी तुमको देखा नहीं।
फाग आते रहे फाग जाते रहे,
आज तुम राधिका जैसी हमको लगी—
सोचते हैं कृष्ण बन भी पायेंगे हम।।
पीली सरसों कहीं देख ले ना हमें।
आओ गुलमोहर की छॉव में हम चलें,
तुम भिगो दो हमें हम भिगो दें तुम्हें—
ऐसी पच्चीसवी होली मनाऐंगे हम।।
गेंहू की बालियां हस रही देख लो।
फूल भंवरों से करते हैं अठखेलियां,
ऐसे मौसम मे ये दूरियां किसलिए—
आओ जख्मी गले से लगायेंगे हम।।
डा0सुदेश जख्मी
Friday, February 28, 2014
Friday, February 14, 2014
तू अगर प्यार से मुझको
तू अगर प्यार से मुझको अपना कहे
तेरे गम सारे जानम उठाता रहूं
गीत मेरा गजल मेरी तू ही तो है—
तू अगर साथ दे रोज गाता रहूं।
मेरे ख्वाबों में तू और ख्यालों में तू
मेरी सांसों में महकी है खुशबू तेरी
तुझपे कुर्बान ये जानों ईमान हैं—
तुझको पलकों पे अपनी बिठाता रहूं।।
प्यार में कोई भी शर्त सौदा नहीं
दिल के बदले में दिल की ही दरकार है
बांधकर अपनी जुल्फों को आये अगर—
उम्र भर उनमें गजरे लगाता रहूं।
मेरे रहते हुये आंख नम हों तेरी
ये तेरी जिंदगी में तो होगा नहीं
जो मेरा है वो सब जानें जां है तेरा—
तेरी खुशियों पे सब कुछ लुटाता रहूं।।
सात जन्मों तलक साथ चाहूं तेरा
ये मेरे दिल की धडकन की आवाज है
तू यूं ही हीर बन—बन के आती रहे—
मैं यूं ही रांझा बनकर के आता रहूं।
जख्म खाये हैं जख्मी ने बेशक बहुत
जबसे तुम हो मिले दिल को आराम है
बस यूं ही मेरे पहलू में बैठे रहो—
दर्दो गम मैं जहां के भुलाता रहूं।।
डा0सुदेश यादव जख्मी
कवि/पत्रकार
Tuesday, January 21, 2014
दिल जान जिगर अपना
दिल जान जिगर अपना,सब तुम पर वारा है
तुम प्यार करो मुझको, अधिकार तुम्हारा है
प्यार से बैठाईए हमें भी सोने दीजिए
दूरियां रहें ना कभी पूरे अरमां हों सभी
इनकार को भी इकरार होने दीजिए
मेरी खातिर यारा तुम्हें रब ने उतारा है
तुम प्यार करो मुझको..........
दिल करे शाम ढले हाथों में हाथ लिए
दूर कहीं तुम्हें ले जाउं तन्हाई में
दुनियां है संगदिल कौन कहां जाये मिल
जीना नहीं हमको कहीं भी रूसवाई में
इसे और दर्द ना दो दिल गम का मारा है
तुम प्यार करो मुझको..........
ऐसा रंग रूप तुम्हें दिया है खुदा ने इसे
धारदार नजरों से जग की बचाईए
दिल में छुपा लूं तुम्हें आंखों में बसा लूं तुम्हें
सारी उम्र देखूं ऐसा ख्वाब बन जाईए
अब तुमसे दूर रहना पल भर ना गंवारा है
तुम प्यार करो मुझको..........
इतने करीब आओ सबको ही भूल जाओ
हमें एक दूसरे के दिल में समाना है
प्यार है जरूरी बडा जिंदगी जीने के लिए
जख्मी ये राज हमें सबको बताना है
तेरा मन गर मंदिर है मेरा मन गुरूद्वारा है
तुम प्यार करो मुझको..........
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