तू अगर प्यार से मुझको अपना कहे
तेरे गम सारे जानम उठाता रहूं
गीत मेरा गजल मेरी तू ही तो है—
तू अगर साथ दे रोज गाता रहूं।
मेरे ख्वाबों में तू और ख्यालों में तू
मेरी सांसों में महकी है खुशबू तेरी
तुझपे कुर्बान ये जानों ईमान हैं—
तुझको पलकों पे अपनी बिठाता रहूं।।
प्यार में कोई भी शर्त सौदा नहीं
दिल के बदले में दिल की ही दरकार है
बांधकर अपनी जुल्फों को आये अगर—
उम्र भर उनमें गजरे लगाता रहूं।
मेरे रहते हुये आंख नम हों तेरी
ये तेरी जिंदगी में तो होगा नहीं
जो मेरा है वो सब जानें जां है तेरा—
तेरी खुशियों पे सब कुछ लुटाता रहूं।।
सात जन्मों तलक साथ चाहूं तेरा
ये मेरे दिल की धडकन की आवाज है
तू यूं ही हीर बन—बन के आती रहे—
मैं यूं ही रांझा बनकर के आता रहूं।
जख्म खाये हैं जख्मी ने बेशक बहुत
जबसे तुम हो मिले दिल को आराम है
बस यूं ही मेरे पहलू में बैठे रहो—
दर्दो गम मैं जहां के भुलाता रहूं।।
डा0सुदेश यादव जख्मी
कवि/पत्रकार

No comments:
Post a Comment