तुम बिन क्या जीवन है एक बार चले आओ
मिलने का बहुत मन है एक बार चले आओ।
जबसे मिली है मेरी तुमसे निगाह सखी
कैसे बतलाउं तुम्हें भूल नहीं पाता हूं
रात दिन मिलने के ख्वाब संजोता हूं मैं
हर पल मिलने की आस लगाता हूं
बेसुध ये तन मन है एक बार चले आओ।
मिलने का बहुत मन है......
गली गली ढूंढा तुम्हें भटका मैं चहुं ओर
मेरा कहीं ठौर ठिकाना अब न रहा
तू ही मेरा सब कुछ मुझमें रहा न कुछ
भूख प्यास धूप छांव चुपचाप सह गया
तुम्हें किया समर्पण है एक बार चले आओ।
मिलने का बहुत मन है......
हमने गुजारे थे जो संग संग पल क्षण
उन्हें याद कर जानें कहां खो जाता हूं
तुम मुझे कृष्ण पुकारती हो प्राणप्रिय
मैं भी तुम्हें राधा राधा राधा ही बुलाता हूं
सूना वृन्दावन है एक बार चले आओ।
मिलने का बहुत मन है......
डा0 सुदेश यादव दिव्य उर्फ जख्मी
गीतकार मेरठ
मो. 9027687780,9368666665