ehshash dil ka
Thursday, August 7, 2014
क्यों उदासी का मंजर है
क्यों उदासी का मंजर है बतलाईये
दिल तुम्हारा है ये घर ना घबराईये
कौन रोकेगा अश्कों को बहते हुये—
मेरी आंखों मे रहकर ना यूं जाईये।।
डा0सुदेश यादव जख्मी
कवि/पत्रकार
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