Wednesday, August 13, 2014

मुस्कुराने के दिन आ गये


इस  घनी  भीड  में  तुम  ही तुम छा गये।
ये   भी   संयोग  है  तुम  मुझे  भा   गये।।
कल के बारे में अब कुछ भी ना सोचिये—
मुस्कुराने  के  दिन  आ  गये—आ गये।।
        डा0सुदेश यादव जख्मी
          साहित्यकार/पत्रकार

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