कहां है मेरा हिन्दोस्तान— कहां है मेरा हिन्दोस्तान।
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
ऋषि और मुनियों की तपोभूमि भारत था,
आज उसी भेष में ही बाबाओं की भीड है।
अंधविश्वास बढा देख रहा समय खडा,
मंदिरों से ज्यादा यहां पुज रहा पीर है।।
सांई का विवाद कहीं, कहीं जात—पात का है,
कहीं बलि चढने को आदमी अधीर है।
कुर्सियों का खेल है ये सियासत का मेल है ये,
देश के प्रति न कोई आज गंभीर है।।
अपने धर्म संस्कृति की हम, खो बैठे पहचान,
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
छोटे—छोटे देश देखो आज हमें घूर रहे,
जिनको हमेशा दिया हमनें सहारा है।
कई दफा युद्ध हुये और समझौते हुये,
सीमाओं पे कई बार हमनें उन्हें मारा है।।
अपना वो देश है ये जिसमें बलिदानियों ने,
कई — कई बार अपने सर को उतारा है।
1 8 5 7 में अपने शहीदों ने ही,
गोरी सरकार को भी खूब ललकारा है।।
बिस्मिल शेखर ने सुभाष ने यहां दिये बलिदान,
जिसका कभी हुआ करता था,दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
बाल मजदूरी करें पेट फिर भी न भरे,
गोदामों में माल सडे , बंद इसे कीजिये,
शिक्षा स्वास्थ्य चिकित्सा को और भी बढावा मिले,
जिनके हैं जो भी अधिकार उन्हें दीजिये।
नारियां सुरक्षित रहें कोई न अशिक्षित रहे,
दीन — दु:खी निर्धन का भी हाल पूछिये।।
गददी से गददार हटे मजहबों की खाई पटे,
एक दूसरे का हाथ हाथों में लीजिये,
तब हम कह पायेंगे सारे भारत मेरा महान,
जिसका कभी हुआ करता था, दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—
दुराचारी जेल में हों भ्रष्टाचार बंद हो,
ऐसी ही व्यवस्थाओं की आज दरकार है,
भाईचारा एकता हो उसी में अनेकता हो,
वो ही रहे यहां जिसे भारत से प्यार है।
सीमाओं पे चौकसी हो घुसपैठ बंद करो,
गोली से उडा दो उसे जो भी गददार है।।
कोई फिर सुभाष बनें लेकर के तिरंगा चले,
बच्चा — बच्चा आज जान देने को तैयार है।
जख्मीं पडी भारती दिव्य अब तो लो संज्ञान,
जिसका कभी हुआ करता था दुनियां में सम्मान।।
कहां है मेरा हिन्दोस्तान—

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