Monday, October 20, 2014

तन्हाईयां


तन्हाईयां   हैं  और  मैं,अन्जाना सफर है।
जबसे  गये  हो न कोई खत है न,खबर  है।।
 करते हैं चांद—तारे भी आकर के ठिठोली—
यादों का सिलसिला ही यहां आठो पहर है।।
             डा0सुदेश यादव जख्मी
                  कवि/साहित्यकार







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