ehshash dil ka
Saturday, October 11, 2014
तोडकर बंधनों को जमाने के हम
तोडकर बंधनों को जमाने के हम।
बांधकर प्रेम धागे चलो हम चलें।।
इस जमीं पर कहीं मनवा लगता नहीं—
आसमानों से आगे चलो हम चलें।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी
कवि/साहित्यकार
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