गुलशन से एक फूल चुराया है आपने
कलियों से भरा सेहरा सजाया है आपने।
सारे चमन की खुशबू को बांहों मे समेटा
और गुलिस्तां को प्यार बनाया है आपने।
अफरोज हो गये हैं सितारे भी इर्द—गिर्द
बस चांद को जमीं पे बुलाया है आपने।
मिलता नही है हर किसी को ऐसा मसीहा
दुनियां में जानें कितने हैं पाया है आपने।
बांधा है ऐसी डोर से दिल के अजीज को
शादी का नाम देके निभाया है आपने।
शुभकामनाएं दे रहे जख्मीं तुम्हे यही
महके वो फूल जिसको खिलाया है आपने।।

No comments:
Post a Comment