ehshash dil ka
Wednesday, July 23, 2014
तुम्हारी जुल्फ के बादल से कुछ बूंदें चुराउंगा
तुम्हारी जुल्फ के बादल से कुछ बूंदें चुराउंगा।
तुम्हारी आंख के काजल में फिर उनको मिलाउंगा।।
लिखूंगा फिर गजल कोई तुम्हारी मुस्कुराहट पर—
सुनोगे प्यार से गर तुम, तुम्हें गाकर सुनाउंगा।।
डा0सुदेश यादव जख्मी
कवि/पत्रकार
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