लगा लो गले ना, बनो बेरहम
मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।
चले आओ होली का करके बहाना
तुम्हें चाहते हैं हम रंग लगाना
बड़ी दूर से आये, मिलने को हम
मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।
गुलों का है मौसम समा प्यारा—प्यारा
अगर चाहो दिल आज रख लो हमारा
उदासी को रंगों से, कर भी दो कम
मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।
वो देखो गुलों पर भ्रमर गा रहे हैं
बसंती है रूत मस्त दिन आ रहे हैं
गई ठण्ड मौसम, हुआ है गरम
मुहब्बत का हमपे भी कर दो करम।
कवि डा. सुदेश यादव दिव्य
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