होली का ये त्यौहार है मस्ती में आईये
मैं गीत सुनाता हूं, तो ताली बजाईये।
भीगा हुआ बसंत का मौसम ये सुहाना
फूलों पे झूमते हुये भवरों का वो गाना
आओ इन्हीं के साथ में होली मनाईये।
पागल दीवाने मनचले सडको पे आ गये
इतना उड़ा गुलाल के बादल से छा गये
कई तो कह रहे हैं चलो कुछ मंगाईये।
भाभी कहीं रंगी पड़ी देवर कहीं पड़े
साली दिखाती जीजा को नखरे बड़े—बड़े
कोई कह रही है आईये, कोई बोले जाईये।
डा. सुदेश यादव दिव्य

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