Tuesday, March 5, 2024

आया बसंत


 आया बसंत देखो, फैली हरियाल है

पीली सरसों ने तो बस नींद चुरा ली है।


फाग का महीना आया, कोयल ने गीत गाया

बच्चे चले लेके पिचकारियों से खेलने

कई रंग वाले फूल, डालियों पे रहे झूल

चले मस्त भंवरे, फुलवारियों से खेलने

कलियों से लदी देखो, अब हर एक डाली है

पीली सरसों ने तो बस नींद चुरा ली है।


कहीं है अबीर और कहीं है गुलाल देखो

कहीं भरे कई रंग वाले गुब्बारे हैं

देवरों को खोज रहीं आज सारी भाभियां भी

कोई भंग पीके एक, दूसरे को मारे है

हमने भी दोस्तों से कल एक मंगा ली है

पीली सरसों ने तो बस नींद चुरा ली है।



स्वस्थ मस्त युवाओं की टोलियां भी घूम रहीं

जो भी मिले राह में गुलाल लगा देते हैं

जहां लगा डीजे देखा, थोडी देर वहीं रूके

दोस्तों के साथ में ही ठुमके लगा लेते हैं

सब देख के मुस्काती गेहूं की बाली है

पीली सरसों ने तो बस नींद चुरा ली है।


कहीं हैं पकोडे कहीं दही के बडे बने हैं

कहीं पानी पूरी संग तीखा जलजीरा है

कहीं आके बरसाने राधा संग खेलती है

कहीं रंगी माधव की भगती में मीरा है

रचना ये दिव्य ने भी होली पे बना ली है

पीली सरसों ने तो बस नींद चुरा ली है।

          डा. सुदेश यादव दिव्य

          अराध्या प्रकाशन, मेरठ

          मो. 9027687780

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