Monday, March 27, 2017

माँ



समन्दर प्यार ममता का, जहां में माँ ही होती है।
हमें सूखे में रखती और खुद, गीले में सोती है।।
जरा सी चोट लग जाये अगर, बेटे या बेटी को—
हमारे साथ हंसती है, हमारे साथ रोती है।।
           कवि सुदेश यादव जख्मी

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