1. सारा जग है जानता, महिमा तेरी अपार।
सेवक हूं तेरा प्रभु, कर दो बेडा पार।।
2. कैसे मैं कर पाउंगा, गुणों का तेरे बखान।
असीमित महिमा तेरी, तुम हो गुणों की खान।।
3. सदा रहो सब प्रेम से, त्याग झूठ अभिमान।
हिंसा को त्यागो सभी, दिया हमें ये ज्ञान।।
4. जब—जब भी नैया मेरी फसी बीच मझधार।
तेरी कृपा से ही प्रभु, हुई भंवर से पार।।
5. जग तेरी आराधना, करता है करतार।
सबके संकट काट दे तू, जग के पालनहार।।
कवि सुदेश यादव जख्मी
Mob. 9368666665

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