तुमसे में दूर बहुत अच्छा था।
कितना भोला था और सच्चा था।।
तुमने सिखला दी मुझको मक्कारी—
बिन तुम्हारे मैं बहुत अच्छा था।।
डा.सुदेश यादव दिव्य
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