Tuesday, October 4, 2022

क्यों समय व्यर्थ हो

 शब्द हूं मैं अगर उसका तुम अर्थ हो

मेरे जीवन की तुम ही तो सामर्थ हो

बिन तुम्हारे तो मैं शून्य जैसा हुआ—

मान जाओ प्रिय क्यों समय व्यर्थ हो।।

            डा.सुदेश यादव दिव्य

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