शब्द हूं मैं अगर उसका तुम अर्थ हो
मेरे जीवन की तुम ही तो सामर्थ हो
बिन तुम्हारे तो मैं शून्य जैसा हुआ—
मान जाओ प्रिय क्यों समय व्यर्थ हो।।
डा.सुदेश यादव दिव्य
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