तुम धडकन तुम सांस,सजन घर आ जाओ
बढती जाये प्यास सजन घर आ आओ।
तुम बिन सावन में पतझड ना हरियाली
घर आंगन सू ना बाहर खाली — खाली
सूख गई सब घास सजन घर आ जाओ।
बढती जाये प्यास.............
तेरी बांहों में कटती थी दिन — रातें
तुम बिन बीत गई हैं कित नी बरसातें
मनवा हुआ उदास सजन घर आ जाओ।।
बढती जाये प्यास.............
तुम बिन खेतों मे सरसों भी ना फूली
तुम बिन झूला मैं सखियों संग ना झूली
सूना है मधुमास सजन घर आ जाओ।
बढती जाये प्यास.............
जग लगता सूना , सूनी चौपालें हैं
यादों के रिसते दिल में अब छाले हैं
घर लगता वनवास सजन घर आ जाओ।।
बढती जाये प्यास.............
आ जाओ बालक भी तुम्हें बुलाते हैं
तन्हाई से बातें कर सो जाते हैं
कौन बंधाये आस सजन घर आ जाओ।
बढती जाये प्यास.............
आखिर क्या है बात जो हमसे रूठ गये
क्या जन्मों के बंधन सारे टूट गये
कोई नही है पास सजन घर आ जाओ।।
बढती जाये प्यास.............
भाग्य ने देखो कैसे — कैसे जख्म दिये
जहर जुदाई पीकर कैसे कोई जिये
अब ना करो निराश सजन घर आ जाओ।।
बढती जाये प्यास.............

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