Saturday, August 31, 2013

भले ही हमें ना पुकारा

भले  ही  हमें  ना  पुकारा करो तुम
मगर अपनें  गेंसू  संवारा  करो तुम।

ये  चेहरा  खिला  है कंवल की तरह
ये निखरा  बदन  गंगाजल की तरह
ना यूं तीर नजरों के मारा करो तुम।
मगर अपनें गेंसू..............

ये    उलझी   लटें   और   ये  सादगी
हो  जैसे   बहारों   की  ये    ताजगी
करीब आओ यूं ना किनारा करो तुम।
मगर अपनें गेंसू..............

तुम्ही   चांद   तारों   की   बारात   हो
हमें  तो   खुशी   है  कि  तुम साथ हो
कभी दिल ये रोशन हमारा करो तुम। 
मगर अपनें गेंसू..............

अगर   तेरे   गेसू    संवर   जायेंगे
घटाओं  से  बादल  बिखर  जायेंगे
बरस जायेंगे गर इशारा करो तुम।
मगर अपनें गेंसू..............

ये  माना  खुदा   की  हो  तस्वीर तुम
मगर जख्मीं की तो हो तकदीर तुम
जिताकर हमें खुद भी हारा करो तुम
मगर अपनें गेंसू..............

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